Mata Vaishno Devi Yatra in Hindi

Mata Vaishno Devi Yatra in Hindi

जयकारा शेरावाली दा| बोल साचे दरबार की जय

Mata vaishno devi kaise jaaye
Mata Vaishno Devi

माता वैष्णो देवी हिन्दुओ का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल हैं| ऐसा कोई ही हिन्दू होगा जो माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए त्रिकुट पर्वत पर स्थित माता के भवन नहीं आना चाहता हैं| माता वैष्णो देवी त्रिकुट पर्वत पर पिंडी के रूप में विराजमान हैं| जिसने भी माता वैष्णो देवी से जो भी माँगा हैं माँ ने उसे वह सब कुछ दिया हैं| माँ अपने भक्तो की मन की मुराद जरूर पूरी करती हैं| माँ जब भी बुलाती हैं, माता के भक्त दौड़े-दौड़े कितने भी कष्ट सहन कर माता के दर्शन के लिए आ जाते है| माँ के दर्शन की अभिलाषा इतनी तीव्र हो जाती हैं कि जब तक भक्त माता के दर्शन न करले उसके मन को चैन नहीं मिलता हैं| भक्त एक सांस जय माता दी बोलते हुए ऊँचे पहाड़ो पर माता के दरबार में हाजरी लगाते हैं|

माता वैष्णो देवी की कहानी(Mata Vaishno Devi Story in hindi)

प्राचीन कहानियो के अनुसार जब धरती पर राक्षसों का आतंक बहुत अधिक बढ़ गया था तो माँ काली, माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी तीनो ने एक शक्ति को जन्म दिया| इस शक्ति ने माता के परमभक्त रत्नाकर नाम के व्यक्ति के यहाँ जन्म लिया|

इस कन्या का नाम वैष्णवी रखा गया| वैष्णवी नाम की यह कन्या अलोकिक शक्तियों की स्वामी थी| वैष्णवी का जन्म सिर्फ लोगो के कल्याण के लिए हुआ था| अपने इसी उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए माता वैष्णो देवी ने जंगल में जाकर तपस्या की|

यह उस समय की बात है जब भगवान श्री राम भी अपने चोदह वर्ष के बनवास पर जंगल में थे| भगवान् श्री राम की मुलाकात माता वैष्णवी से हुई| माता ने प्रभु श्रीराम को तुरंत पहचान कर उन्हें अपने अन्दर समाहित होकर एक शक्ति के रूप में अवतरित होने के लिए निवेदन किया|

भगवान् श्रीराम ने उस समय उनके निवेदन को ठुकरा दिया और माता से वादा किया कि मैं तुम्हारा निवेदन वनवास से लोटने के बाद ही कर पाऊँगा| भगवान् राम जब वनवास के बाद लोट रहे थे तो उन्होंने माता वैष्णो को त्रिकुटा पर्वत पर आश्रम बनाने को कहा|  

एक दूसरी प्राचीन कथा के अनुसार, माता के एक परम भक्त श्रीधर थे| श्रीधर जाति से ब्राह्मण थे| एक बार श्रीधर ने अपने घर में माता का भंडारा रखा| उसमे आस पास के सभी लोगो का बुलावा था| श्रीधर ने भंडारे में आने के लिए अघोरी साधू भैरो और उसके सभी शिष्यों को भी आमंत्रित किया था| अघोरी साधुओ ने भंडारे में माँसाहार खाना बनवाने के लिए जिद की| श्रीधर ने जब ऐसा करने से मना किया तो भैरो उस पर बहुत अधिक क्रोधित हो गया और उसको जान से मारने की कोशिश करने लगा|

अपने भक्त पर यह अत्याचार देख कर माँ से रहा न गया| माँ कन्या के रूप में भंडारे में प्रकट हो गयी| माँ ने जब भैरो को ऐसा करने से मना किया तो भैरो ने माता वैष्णो देवी पर भी हमला कर दिया| माँ भैरो से बचने के लिए त्रिकुट पर्वत पर आ गयी और एक गुफा में 9 महीने के लिए तपस्या की| माता की रक्षा करने के लिए स्वयं हनुमान जी भी उनके साथ थी| माता की तपस्या में कोई भी विघन न आये इसके लिए गुफा के द्वार पर हनुमान जी पहरेदार बने हुए थे| क्योंकि माँ ने इस गुफा में 9 महीनो तक तपस्या की थी इसीलिए इस गुफा का नाम गर्भजून या अर्धकुंवारी रखा गया| जैसे कोई बच्चा अपनी माँ के गर्भ में 9 महीने तक रहता हैं उसी तरह से माँ वैष्णो देवी भी 9 महीने तक इस गुफा में रही|

गुफा से निकलकर माँ ने भैरो पर त्रिशूल से वार किया और उसकी गर्दन काट दी| गर्दन काटने के बाद भैरो को अपनी करनी का पछतावा हुआ उसने माँ से माफ़ी मांगी| भोली माँ ने अपने शत्रु को भी माफ़ कर दिया और उसको यह वरदान दिया कि अगर कोई भी भक्त त्रिकुट पर्वत पर मेरे दर्शन को आएगा तो उस भक्त को मेरे दर्शन के बाद तुम्हारे भी दर्शन करने पड़ेंगे| अगर वह ऐसा नहीं करता हैं तो उसे मेरे दर्शन से होने वाला लाभ नहीं मिलेंगा और उसकी माता वैष्णो देवी की यात्रा भी अधूरी रहेगी |

तो आइये भक्तो अब हम माता वैष्णो देवी की सम्पूर्ण यात्रा के बारे में जानते हैं|

माता वैष्णो देवी का मंदिर त्रिकुट पर्वत पर हैं|

त्रिकुट पर्वत कटरा शहर, जम्मू, जम्मू और कश्मीर राज्य में हैं|

माता का भवन कटरा से 12 किलोमीटर दूर ऊँची पहाडियों पर स्थित हैं|

माता के दरबार में आने के लिए आप रेल, बस या हवाई जहाज से भी आ सकते हैं|

बस के द्वारा

आप दिल्ली या भारत के कई अन्य शहरों से कटरा तक बस से आ सकते हैं|

रेल के द्वारा

आप भारतीय रेल से भी जम्मू तक आ सकते हैं| अब क्योंकि कटरा में भी रेलवे स्टेशन बन गया है| तो आप जम्मू या कटरा तक ट्रेन तक आ सकते हैं| अगर आप ट्रेन से जम्मू तक आये है तो आगे की यात्रा आप बस के द्वारा कर सकते हैं| आप जम्मू से कटरा तक बस से आ सकते हैं|

हवाई जहाज के द्वारा

भारत के कई शहरो से जम्मू तक हवाई यात्रा सेवा भी हैं| आप हवाई जहाज से जम्मू तक आ सकते हैं और उसके बाद आप प्राइवेट टैक्सी या बस से कटरा तक पहुच सकते हैं|

कटरा से माता के भवन कैसे पहुचे

यात्रा पर्ची कटाना

कटरा के बाज़ार में यात्रा पर्ची काउंटर स्थित हैं| कटरा पहुचते ही सबसे पहले आप यात्रा की पर्ची कटवा ले| इस पर्ची को कटने से 6 घंटे के अन्दर बाण गंगा चेक पोस्ट पर करनी होती हैं| उसके बाद आप आराम से अपनी यात्रा धीरे-धीरे पूरी कर सकते हैं|

पैदल

आप कटरा से पैदल दिन में किसी भी समय अपनी चढ़ाई शुरू कर सकते हैं| पहाड़ अधिक ऊंचे हैं इसलिए आप धीरे-धीरे आराम से अपनी यात्रा पूरी करे|    

घोड़ो के द्वारा

जो लोग पैदल पहाड़ पर नहीं चढ़ सकते हैं वो लोग घोड़ो पर बैठकर अपनी यात्रा पूर्ण कर सकते हैं|

पिट्ठू के द्वारा

अगर आप खुद पैदल यात्रा करने में सक्षम हैं| लेकिन  आपके पास सामान ज्यादा हैं और छोटे बच्चे भी हैं तो आप स्थानीय लोग जो वहां पर समान और बच्चो को अपनी पीठ पर लादकर आपके साथ-साथ ले जाते हैं| आप उन्हें भी हायर कर सकते हैं |

इ-ऑटो के द्वारा

अब अर्ध कुंवारी से माता के भवन तक इ-ऑटो की सुविधा भी हैं| आप यह दूरी इ-ऑटो से भी पूरी कर सकते हैं|

पालकी के द्वारा

जो लोग बीमार हैं और पैदल या घोड़े से यात्रा करने में असमर्थ हैं तो उन लोगो के लिए पालकी की सुविधा भी उपलब्ध हैं| इस पालकी में एक कुर्सी होती हैं तथा दो बल्लिया लगी रहती हैं जिसको चार व्यक्ति अपने कंधो पर खीचते हैं |

हेलीकाप्टर के द्वारा

आप हेलीकाप्टर के द्वारा सांझी छत हेलीपैड  तक हेलीकाप्टर से भी जा सकते हैं|

वैष्णो देवी यात्रा के दौरान रास्ते में आने वाले दर्शनीय स्थल

बाण गंगा

यह वह स्थल है जहाँ पर गंगा का पानी पूर्ण वेग से आता हैं| जब हनुमान जी को प्यास लगी तो माता ने उनकी जल के प्रति व्याकुलता देख कर बाण से जमीन के अन्दर से पानी निकाल दिया था| इसीलिए इस स्थान का नाम बाण गंगा हैं|

चरण पादुका

चरण पादुका मंदिर में आप माता के चरणों के पद चिन्ह का दर्शन करते हैं| इस स्थान पर खड़े होकर माता वैष्णो देवी ने अपने बाल धोये थे| माँ के पैरो के निशान आज भी यहाँ मौजूद हैं| 

अर्ध कुंवारी

अर्ध कुंवारी में आप गर्भ जून गुफा के दर्शन कर सकते हैं| इस गुफा में माता भैरो से बचने के लिए लगभग 9 महीने तक रही थी|

माता का भवन

अर्ध कुंवारी से 6 किलोमीटर दूर ऊँची पहाड़ी पर माता का भवन हैं| इस भवन में दो गुफाये हैं| एक प्राकृतिक गुफा हैं जो साल में कभी-कभी खोली जाती हैं| दूसरी कृत्रिम गुफा हैं| इस गुफा के द्वार पूरे वर्ष खुले रहते हैं| माता के पिंडी रूप में दर्शन के बाद जब आप भवन से बाहर आयेंगे तो आप को एक चांदी का सिक्का और मिश्री का प्रसाद मिलता हैं|  

भैरो मंदिर

माता के भवन से 8 किलोमीटर की दूरी पर भैरो का मंदिर हैं| आप जब भी माता वैष्णो देवी के दर्शन को जाए तो भैरो बाबा के दर्शन करना कभी भी नहीं भूले| क्योंकि तब ही आपकी यात्रा पूर्ण मानीं जाएगी|

क्या खाए

आप को यहाँ पर माता वैष्णो देवी श्राइन ट्रस्ट के द्वारा खुले हुए रेस्टोरेंट से शाकाहारी भोजन मिल जायेगा|

कहाँ पर रुके

कटरा में जगह-जगह अच्छे और सस्ते होटल हैं| अगर आप अर्ध कुंवारी या सांझी छत पर रात बिताना चाहे तो वहां पर भी आपको कम्बल, तकिये आदि ट्रस्ट के द्वारा दिए जाते है|

कब जाए

यूँ तो माता वैष्णो देवी में भक्तो का ताँता पूरे वर्ष लगा रहता हैं| सर्दी के मौसम में यहाँ पर ठण्ड अधिक पड़ती और बर्फ भी गिरती हैं| अगर आप बर्फ को देखने का लुत्फ़ लेना चाहते हैं तो आप यहाँ सर्दियों में जाए| लेकिन अगर आपके साथ छोटे बच्चे हैं तो मार्च से अक्टूबर महीने के बीच ही आप माता वैष्णो के दर्शन के लिए आये |

क्या लाये

यूँ तो आप अपने साथ इस तीर्थ स्थान की सुखद यादो को लाते ही हैं| लेकिन आप जम्मू से लकड़ी का सामान, कश्मीरी शाल, कश्मीरी लोगो के द्वारा पहनी जाने वाली पोशाके आदि ला सकते हैं|

आस पास के देखने योग्य जगह

शिव खोरी, रघुनाथ मंदिर, पटनी टॉप आदि कटरा के आस पास घुमने लायक जगह हैं|

माता वैष्णो देवी हम सभी की मनोकामना पूरी करे| हमारे जीवन को खुशियों से भर दे|

जय माता दी   

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